तलाश
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
जितने देखे सब
भटक रहे, कही किसी को नहीं मिला प्रकाश
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
कोई कहे गुरु,
कोई बोले साई, कोई पुकारे भगवान
कोई जपे माला,
कोई नहाये गंगा, कोई ले दुसरो के प्राण
कोई वाचे गीता,
कोई जाये मंदिर , कोई पढ़े कुरान
कोई सुने प्रवचन,
कोई गाये भजन ,कोई सुने अज़ान
कोई एक बार,
कोई दो बार ,कोई पाँच भर करे तेरे घुँघान
रास्ता तो बहुत
दिखाते, नहीं है किसी को भी रास्ते का ज्ञान
मक्का मदीना,
काशी मथुरा, मैं नहीं मिले ,ढुँदना नहीं आसान
सब प्यासे,नहीं
किया अब तक किसी ने तेरा शाही मदिरापान
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
जितने देखे सब
भटक रहे, कही किसी को नहीं मिला प्रकाश
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
तड़के मिला एक
बालक चहरे पर थी अदभुत मुस्कान
कहने लगा उम्र
बीत गई, क्या है अब तुमारा अरमान
मैंने उत्तर
दिया बहुत देर से ढूंढ रहा शायद मिल जाये भगवान
वो बोला अगर
अभी मिल जाये तो क्या मांगोगे उससे वरदान
मैं चुपचाप,
वो मुस्कुराया, बोला लगायो पहले तुम ध्यान
ऑंखें बंद करते
ही न जाने कहा खो गयी अदभुत मुस्कान
आज एक प्यासे
को पानी पिलाया उसमे देखी वो मुस्कान
एक अंधे को रास्ता
दिखाया उसमे देखी फिर वो मुस्कान
समझ गया भगवान
ने दिखा दिए मुझको आज भगवान
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
जितने देखे सब
भटक रहे, कही किसी को नहीं मिला प्रकाश
जब से लिया जन्म,
देखता हूँ सब को है किसी की तलाश
आपका अपना अनुराग
"परदेसी" ०२/०४/१४
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