धमाका
आज सुबह पुराने
चौक में
बहुत ज़ोरदार
धमाका हुआ,
सुना दो
घायल और
चार चल
बसे
असलम दर्जी की
दुकान पर
नया जोड़ा
सिलवाने आये
गोविन्द बिना
जोड़े पहने
चल बसे
गिरधारी चाय वाले
के पास
बैठे हमीद
भाई अपनी
चाय के
कप को
बिना पीये
ही चल
बसे
तरलोक सिंह जी
ने तो
बड़ा ग़ज़ब
कर दिया
सब्जी का
थैला बिना
घर पहुंचाए
ही चल
बसे
बहुत नाराज़ हूँ,
दोस्तों से
सब अपना
काम बीच
में अधूरा
छोड़ और
मेरे बिना
ही चल
बसे
उन दरिंदो से
एक ही
सवाल है
मेरा, क्या
करने आये
थे और
क्या कर
के चल
दिए ?
क्या मुस्लमान को
मारने आये
थे और
हिन्दू को
मार के
चल दिए?
या फिर हिन्दू
को
मारने आये थे, और मुस्लमान
को मार
के चल
दिए ?
तुम न हिन्दू
न मुस्लमान,
तुम तो
अपने अंदर
के इंसान
को मार
के चल
दिए
आज सुबह पुराने
चौक में
बहुत ज़ोरदार
धमाका हुआ,
सुना दो
घायल और
चार चल
बसे
शहर खामोश है,
कोई शोर
नहीं,सारा
सुनसान जंगल
सा दीखता
है
जंगल में कभी
हाथी हाथी
को मारता, हिरन हिरन
को मारता
नहीं दीखता
है
इंसान ही एक
ऐसा अकेला
जानवर है
जो दूसरे
इंसान को
मारता दीखता
है
इतना नीचे गिर
गया है
के अब
उस से
जंगल का
जानवर बेहतर
दीखता है
आज सुबह पुराने
चौक में
बहुत ज़ोरदार
धमाका हुआ,
सुना दो
घायल और
चार चल
बसे
शहर रहने के
लायक नहीं,
हर आदमी
इसमें डरा
सा लगता
है
मैं भी डरता
हूँ, अब
अपने को
तो जंगल
ही हरा
भरा लगता
है
इंसान के हाथो
मरने से,
जानवर के
हाथो मरना
अच्छा लगता
है
आजकल जानवर इंसान
और इंसान
जानवर सा
लगता है
आज सुबह पुराने
चौक में
बहुत ज़ोरदार
धमाका हुआ,
सुना दो
घायल और
चार चल
बसे
आपका अपना अनुराग
" परदेसी" १६/०४/१४
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