Sunday, 6 April 2014

मानवता का गीत

           मानवता का गीत

“आओ समस्त मानवता का एक नया गीत लिखे”

सब ने देश भक्ति के गीत बहुत  गाये और लिखे
तुमने अपने देश, हमने अपने देश के लिए लिखे
गोरो ने अपने ,कालो ने अपने, हमने अपने लिखे
किसी ने जंग के, किसी ने अमन शांति के लिखे 

“आओ समस्त मानवता का एक नया गीत लिखे”

देश के गीत ने देश को तो जोड़ा पर मानवता को जिंझोड़ा
उसे गा गा कर हमने कितनी मासूम सांसो को निचोड़ा
उसके मान और शान के लिए कितनो ने इस संसार को छोड़ा  
सरहदों के लिए आदमी ने आदमी से इंसानियत का रिश्ता तोडा

“आओ समस्त मानवता का एक नया गीत लिखे”

कुदरत ने धरती को बहुत खूब मालामाल किया है
कोई भूखा कोई प्यासा न रहे पूरा इंतेजाम किया है
क्यों फिर भूख ने आधी दुनिया को बेहाल किया है
शर्म आती है इंसान ने इंसान का यह हाल किया है

“आओ समस्त मानवता का एक नया गीत लिखे”

आयो सम्मान से सब देशो के गीतो को पानी में बहा आये
पूरी दुनिया को एक माला में पिरोने वाला नया गीत गुनगुनाये
अनेक रंगो के झंडो को अलविदा कर एक सफ़ेद परचम लहराये
सब साथ में मिल कर अपनी प्यारी धरती माँ को सब की माँ बनाये

“आओ समस्त मानवता का एक नया गीत लिखे”


आपका  अपना अनुराग " परदेसी" ०६/०४/२०१४

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