भविष्य
ना कोई अपना बता पाया, न कोई दूसरे का बता पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
कोशिश की उसको पढ़ने की, अँधेरे में बहुत तीर चलाया
जो होना था वो हो के ही रहा, कोई नहीं रोक पाया
इंसान ने जानने के लिए हर नया पुराना उपाय सुझाया
किसी ने पंडित से धागा,किसी ने ज्योतिषी से कुंडली बनवाया
कितनो ने इसी के भरोसे कमाया अपना धंधा चमकाया
यह तो ऊपर वाले का खेल है उसकी बनाई है माया
इस गुथी को सुलझाने में हमने कितना वक़्त गवाया
सोच सोच के इसके बारे, हमने पूरी ज़िन्दगी का नक्शा बनाया
इस साल यह, अगले साल वो , सारा का सारा खेल रचाया
जो होना था वो हो के ही रहा, कोई नहीं रोक पाया
इंसान ने जानने के लिए हर नया पुराना उपाय सुझाया
किसी ने पंडित से धागा,किसी ने ज्योतिषी से कुंडली बनवाया
कितनो ने इसी के भरोसे कमाया अपना धंधा चमकाया
यह तो ऊपर वाले का खेल है उसकी बनाई है माया
इस गुथी को सुलझाने में हमने कितना वक़्त गवाया
सोच सोच के इसके बारे, हमने पूरी ज़िन्दगी का नक्शा बनाया
इस साल यह, अगले साल वो , सारा का सारा खेल रचाया
ना कोई अपना बता पाया, न कोई दूसरे का बता पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
लक्ष्मी जोड़ते जिनके लिए ,वो संवर जायेगे दे दो उनको संस्कार
दो उनको सरस्वती का आशीर्वाद,खुद आएगी लक्ष्मी उनके द्वार
अभी काटते पेट, सोचते है बाद में खाये गए व्यंजन दो चार
सोचो आनंद ले पायो गए जब जीवन की धीमी होगी रफ़्तार
पिस पिस के घिस घिस के क्या ऐसे ही छोड़ के जायोगे संसार
आज सूखे में, जाने किस धोखे में, किस दिन का करते हो इंतिज़ार
अभी डूबते हो ,सोचते हो बुढ़ापे में कर लो गए नदिया पार
दिल को खुश रखते हो, उम्मीद में कभी तो आएगी जीवन में बहार
अपने लिए अपनी ज़िन्दगी जी लो दो चार पल मेरे यार
दो उनको सरस्वती का आशीर्वाद,खुद आएगी लक्ष्मी उनके द्वार
अभी काटते पेट, सोचते है बाद में खाये गए व्यंजन दो चार
सोचो आनंद ले पायो गए जब जीवन की धीमी होगी रफ़्तार
पिस पिस के घिस घिस के क्या ऐसे ही छोड़ के जायोगे संसार
आज सूखे में, जाने किस धोखे में, किस दिन का करते हो इंतिज़ार
अभी डूबते हो ,सोचते हो बुढ़ापे में कर लो गए नदिया पार
दिल को खुश रखते हो, उम्मीद में कभी तो आएगी जीवन में बहार
अपने लिए अपनी ज़िन्दगी जी लो दो चार पल मेरे यार
ना कोई अपना बता पाया, न कोई दूसरे का बता पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
तक़दीर की बंद मुठी को कहा कोई कभी खोल पाया
Aapka Apna Anurag “ Pardesi” 04/04/14
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