मैं
नया,
मैं
पुराना
जब अपने पुराने
शहर से
निकला, तो
बिलकुल नया
था मैं,
नए शहर पहुंचते
पहुंचते मैं
पुराना हो
गया
सफ़ेद कुर्ता पहने
और साफ़
दिल के
साथ निकल
आया था
कुर्ता भी मैला
कुचैला और
दिल भी
अब काला
हो आया
था
दोस्तों के साथ
हँसते हँसते
घर
से निकल आया था
अब दोस्तों के
साथ अपनी
हंसी भी
गँवा आया
था
जब अपने पुराने
शहर से
निकला, तो
बिलकुल नया
था मैं,
नए शहर पहुंचते
पहुंचते मैं
पुराना हो
गया
खाली जेब मैं
खाली हाथ
डाल के
निकल आया
था
जेब थोड़ी भरी
पर हाथ
बंद मुठी
बन आया
था
झोली मैं बड़ो
की दुया
और
आशीर्वाद ले आया था
झोली खाली, पर
दुनिया के
लिए तक़दीर
वाला कहलाया
था
जब अपने पुराने
शहर से
निकला, तो
बिलकुल नया
था मैं,
नए शहर पहुंचते
पहुंचते मैं
पुराना हो
गया
छोटे कमरे से खुला खुला निकल
कर उड़
आया था
अब अपने को
बड़े घर
में कटे
परो के
साथ पाया
था
सुरख गाल, लम्बे
घने बाल,
और मुस्कराहट
ले के
आया था
पिचके गाल, गिनेचुने
बाल, मजबूर
हालात अब
मेरा सरमाया
था
जब अपने पुराने
शहर से
निकला, तो
बिलकुल नया
था मैं,
नए शहर पहुंचते
पहुंचते मैं
पुराना हो
गया
शायद बिना सोचे
समझे, आँख
बंद कर
के चला
आया था
गहरी सोच में
डूबा अब,
दिन रात
आँखों को
बंद
पाया था
सकून छोड़ के
ना जाने
कौन से
नए सकून
को दूंदता
आया था
सकून चैन कही
छूट गए,
सिर्फ मेरे
साथ मेरा साया था
जब अपने पुराने
शहर से
निकला, तो
बिलकुल नया
था मैं,
नए शहर पहुंचते
पहुंचते मैं
पुराना हो
गया
आपका अपना अनुराग
"परदेसी" २०/०४/२०१४
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