Sunday, 16 March 2014

चल दिए

चल दिए 

हम उनको मिल कर जी भर रो भी नहीं पाये और वो चल दिए
हम अपने आंसुओ का पूरा मजा भी नहीं ले पाये और वो चल दिए
बरसो जिनका किया इंतजार वो न जाने कब आये और कब चल दिए
आँखें देखती रही राह वो न जाने कौन रास्ते आये और कौन रास्ते चल दिए
हम उनको मिल कर जी भर रो भी नहीं पाये और वो चल दिए

बादल तो बहुत काले और घने थे पर बिना बरसे ही चल दिए
धरती के फटे सूखे होंटो को बिना चूमे बिना छुए ही चल दिए
हमारे तो अभी पर भी नहीं निकले और वो ऊँची उड़ान भर चल दिए
हमारे धड़कते दिल को तोड़ वो न जाने किसके दिल के होकर चल दिए
हम उनको मिल कर जी भर रो भी नहीं पाये और वो चल दिए

न जाने हमको क्यों तनहा छोड़ वो कौन सी महफ़िलो की और चल दिए
शायद हमारा रंग पक्का न था वो न जाने किसके रंग में रंगने चल दिए
हमारा नशा कच्चा था वो न जाने किसके क़े नशे में डूबने क़े लिए चल दिए
हमारा सुर शायद फीका था वो न जाने किस सुर कि तलाश में चल दिए
हम उनको मिल कर जी भर रो भी नहीं पाये और वो चल दिए

अपनी यादों को हमारे पास छोड़ वो न जाने कौन सी नयी कहानी लिखने चल दिए
हमारे आँगन में नीम का दरख़त लगा के वो न जाने क्यों सारे फूलो को तोड़ चल दिए
हमको चार दीवारो में भीगता छोड़ न जाने हमारे घर की छत क्यों उडा कर चल दिए
हमको इस गहरे समुन्दर में उम्र भर के लिए प्यासा छोड़ न जाने कौन किश्ती में बैठ चल दिए
हम उनको मिल कर जी भर रो भी नहीं पाये और वो चल दिए

आपका अपना अनुराग १०/३/२०१४

2 comments:

  1. Good that you have your own blog. It will be good to see your link in FB though, Thanks for sharing. Keep posting and entertaining Kavita Readers like us. (y)

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  2. Nice on Anurag sir ! This is quite haunting memorable.

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