Thursday, 27 March 2014

माँ

      माँ

अभी भी कभी कभी माँ तेरी बहुत याद आती  है
आसमां  देखता हूँ तो तारो के संग बैठी मुस्कुराती है
कभी नींद न आये तो अब भी मुझे आँचल में सुलाती है
गर्मी में अभी भी ठंडी हवा बन के मुझे छू जाती है  
अभी भी कभी कभी माँ तेरी बहुत याद आती  है

अरसा गुजर गया गए हुए पर अभी भी सामने नज़र आती है
तेरी रोटी की सोंधी खुश्बू मेरे मुंहू में अभी भी आती है
कमीज के टूटे बटन में तेरे सुई दागे कि सिलाई साफ आती है
पुराने गीतो में तेरी आवाज़ भी कभी कभी घुंघुनाती है
अभी भी कभी कभी माँ तेरी बहुत याद आती  है

चिठी न लिखी  उसे समय पर वो  करती रही इंतजार है  
खूब मस्ती कि दोस्तों के साथ कि न उस से बाते दो चार है
नहीं कभी उसने फटकारा,हमेशा किया प्यार और दुलार है
बहुत करता हूँ अब याद पर वो चली गयी उस पार है
अभी भी कभी कभी माँ तेरी बहुत याद आती  है

कभी कभी आज दिल छोटे मुन्ने जैसा महसूस करता  है
हमेशा अपनी माँ का छोटा बेटा बने रहने का मन करता है
बुखार में तेरे हाथो से दवाई खाने का मन करता है
तेरी कहानिया और लोरी सुनने का मन करता है
अभी भी कभी कभी माँ तेरी बहुत याद आती  है

तुमारा सिर्फ तुमारा अनुराग  २७/३/१४

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