आखरी
ख़वाहिश
यारो
अब तक न माँगा तुमसे कुछ , पर मेरी तुम आखरी खवाहिश पूरी कर देना
बहुत
दूर निकल आया अपने गाँव से मुझे तब मेरे गाँव
जरूर पहुंचा देना
मत
तोडना मेरे लगाये फूलो को, मुझे उनके बिना सफ़ेद रंग से ही सजा देना
मुझे
सुबह नहला के, सूरज कि पहली किरण का मेरे
मुह से स्पर्श करा देना
गाड़ी
में बिलकुल नहीं अपने चार कंदो पर मुझे मेरी गली कूचो में घुमा देना
यारो
अब तक न माँगा तुमसे कुछ , पर मेरी तुम आखरी खवाहिश पूरी कर देना
मत
बहाना आंसू , मत बहाना आंसू ,जाते जाते मुझे मेरे लिखे गीत सुना देना
मेरे
चंद जिगरी दोस्तों को बिना मिले नहीं जा सकता, उनको खबर भिजवा देना
मेरे
चंद पुराने दुश्मनो को मेरे जाने की यह
खुशी की खबर जरुर भिजवा देना
करंट
छूने से डर लगता है , मुझे चन्दन न सही,आम की लकड़ी पे ही लिटा देना
यारो
अब तक न माँगा तुमसे कुछ , पर मेरी तुम आखरी खवाहिश पूरी कर देना
कही
प्यासा न चला जाऊ मेरे सूखे होंठो में मेरी मनपसन्द शराब के दो बूंद टपका
देना
परदेस
की मिट्टी में नहीं, मुझे देस में अपनों के साथ ही हमेशा के
लिए सुला देना
डूबने
से डरता हूँ, इसलिए मेरी धूल को समुंदर में नहीं, धूल में ही मिला देना
अपनी
ज़िंदगी को मत रोकना एक पल भी , मुझे जल्दी से जल्दी भुला देना
यारो
अब तक न माँगा तुमसे कुछ , पर मेरी तुम आखरी खवाहिश पूरी कर देना
अगर
किसी का उधार न चुका पाया,तो उसको दोस्त समझ के माफ़ कर देना
पर
मेरी एक हंसती हुई तस्वीर जरूर मेरे घर की किसी दीवार पर लगा देना
बहुत
खुश हूँ अपनी माँ के पास जा रहा हु, उसको यह मेरा सन्देश भिजवा देना
परदेस में दीवाली नहीं मन
सका, हर दीवाली पे मेरे नाम का एक दिया जरूर जला देना
यारो
अब तक न माँगा तुमसे कुछ , पर मेरी तुम आखरी खवाहिश पूरी कर देना
आपका अपना अनुराग
१६/३/१४
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