Monday, 24 March 2014

गुमशुदा

गुमशुदा

माता पिता ने दिए संस्कार,और गुरु ने दिया हम को ज्ञान
तब कही अन्धेरे से निकल कर आदमी बन सका एक इंसान
आजकल बहुत कम दिखता है, गुमशुदा ही हो गया है इंसान
भीड़ में कही खो गया,अपने को ही तलाशता है अब इंसान
तेज़ रोशनी की चकाचौंद में शायद आँखें मीच बैठा है इंसान  

मन्दिर मस्जिद बहुत बना दिए,पर उनमें नही रहा अब भगवान
इन में जो बन के बैठे ज्ञानी वो ही बाँट रहे बाँटने वाला ज्ञान
देखते देखते ही कल के यह  फ़कीर बन गए रातों रात धनवान
धर्म के नाम पर सेक रहे रोटी और लड़ा रहे इंसान से इंसान
यह क्या दूसरों को बना पाएगे, जब खुद ही यह बन चुके हैवान

"माता पिता ने दिए संस्कार,और गुरु ने दिया हम को ज्ञान
तब कही अन्धेरे से निकल कर आदमी बन सका एक इंसान
आजकल बहुत कम दिखता है, गुमशुदा ही हो गया है इंसान"

माँ बाप के पास वक़्त नहीं, बनाने में लगे है इस उम्र अपनी पहचान
गुरु भी बिना मोल तोल, बिना पहले लिए दक्षिणा आजकल नहीं देते ज्ञान
बिना दौलत बिना झूठी शौहरत आज की दुनिया में कोई कहा बन पाया महान
ईमानदारी, सचाई ,सब बिकता है, मोल तो लगा के देखो क्यों बने हो मेहमान
कौन लिखता है अब सफ़ेद कागजो पर, इसलिए कभी भी तोड़ देते है दी हुई जुबान

"माता पिता ने दिए संस्कार,और गुरु ने दिया हम को ज्ञान
तब कही अन्धेरे से निकल कर आदमी बन सका एक इंसान
आजकल बहुत कम दिखता है, गुमशुदा ही हो गया है इंसान "

आपका अपना अनुराग "परदेसी" २४/३/१४
 

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