सहेली
मेरी प्यारी माँ
बनी मेरी सब से पहली और गहरी सहेली
मैं घर में पैदा
हुई बिना बहन, बिना भाई, मैं हूँ अकेली
मैं जब कुछ समझती
नहीं वो समझती थी मेरी हर पहेली
मैं थी उसकी चंपा
और वो थी मेरी चमेली
इतना सुन्दर है
मेरा रिश्ता मेरी माँ बन गयी मेरी सहेली
अब मैं कहा रही
अकेली मेरी प्यारी माँ है मेरी सहेली
मैं छोटी थी पर
माँ कहती थी बहुत अलबेली
हमेशा मैं मस्त
रहती,करती थी थोड़ी अठखेली
कभी थकती नहीं
थी,सालो साल घंटो मेरे साथ वो खेली
साये सी रहती हमेशा
हम दोनों की एक ही थी हवेली
मेरी प्यारी माँ
बनी मेरी सब से पहली और गहरी सहेली
मैं घर में पैदा
हुई बिना बहन बिना भाई, मैं हूँ अकेली
नाजो से पाला उसने
मुझे, वो मेरे लिए जाने क्या क्या झेली
माँ से लम्बी हो
गयी गुड़िया, फिर भी रखती वो उसको अपनी हथेली
मैं हूँ मस्त पवन,
एक दिन उड़ जाऊँगी बन के दुल्हन नयी नवेली
पहन लती हूँ उसकी
बयाह की साडी,सच मैं बन गयी उसकी सहेली
मेरी प्यारी माँ
बनी मेरी सब से पहली और गहरी सहेली
मैं घर में पैदा
हुई बिना बहन बिना भाई, मैं हूँ अकेली
मेरा संसार बस
गया, मेरे घर पैदा हुई मेरी नयी सहेली
याद आती है बहुत
मुझे मेरी सहेली, जिसे में छोड़ आई अकेली
जाते जाते मुझे
सब सौंप गयी, दे गयी मुझे वो अपनी पुरानी थैली
दुःख दर्द, हंसी
ख़ुशी सब में साथ रही थी मेरी माँ मेरी सहेली
मेरी प्यारी माँ
बनी मेरी सब से पहली और गहरी सहेली
मैं घर में पैदा
हुई बिना बहन बिना भाई, मैं हूँ अकेली
आपका अपना अनुराग
२१/४/२०१४ "PARDESI"