असमंजस
दिल की सुनू या दिमाग की सुनू
हमेशा असमंजस में रहता हूँ I
किसकी सुनू और किसकी न सुनू,
हमेशा उलझन में रहता हूँ I
दोनों से खून का रिश्ता,
दोनों मेरे ही गावं के,
दोनों पडोसी I
एक की सुनू तो दूसरा नाराज,
क्या करू दोनों ही हैं मेरी आवाज I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ I
किसकी सुनू और किसकी न सुनू,
हमेशा उलझन में रहता हूँ I
दोनों से खून का रिश्ता,
दोनों मेरे ही गावं के,
दोनों पडोसी I
एक की सुनू तो दूसरा नाराज,
क्या करू दोनों ही हैं मेरी आवाज I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
कभी दिमाग से सोचता हूँ I
कभी दिल से सोचता हूँ I
जब दिमाग से सोचता हूँ, तो हमेशा मंजिल तक पहुंचता हूँ I
जब दिल से सोचता हूँ, तो हमेशा धोखे वाली गली पहुंचता हूँ I
न जाने फिर भी दिल की ज़्यादा, दिमाग की कम सुनता हूँ I
नफे नुकसान का हिसाब नहीं, पर ज़िन्दगी जीता हूँ I
दिमाग तो ऊपर है, दिल को अपने दिल के बहुत पास रखता हूँ
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
कभी दिल से सोचता हूँ I
जब दिमाग से सोचता हूँ, तो हमेशा मंजिल तक पहुंचता हूँ I
जब दिल से सोचता हूँ, तो हमेशा धोखे वाली गली पहुंचता हूँ I
न जाने फिर भी दिल की ज़्यादा, दिमाग की कम सुनता हूँ I
नफे नुकसान का हिसाब नहीं, पर ज़िन्दगी जीता हूँ I
दिमाग तो ऊपर है, दिल को अपने दिल के बहुत पास रखता हूँ
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
दिमाग ने बहुत बार बचाया,
दिल ने हर बार लुटाया I
दिमाग देता दौलत और सरमाया,
दिल ने दया और प्यार का पाठ पढ़ाया I
दिमाग ने पैसा कमाया,
पर दिल ने सब खर्च करवाया I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
दिल ने हर बार लुटाया I
दिमाग देता दौलत और सरमाया,
दिल ने दया और प्यार का पाठ पढ़ाया I
दिमाग ने पैसा कमाया,
पर दिल ने सब खर्च करवाया I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
दिमाग हिसाब में बहुत पक्का,
दिल को हिसाब बिलकुल समझ नहीं आया I
दिमाग कभी कभी थक कर सो जाता,
दिल ने दिन रात हंसाया और कभी कभी रुलाया I
दिमाग कभी रिश्तो को नहीं समझ पाया,
उसमे हर बार दिल ही अव्वल आया I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
दिल को हिसाब बिलकुल समझ नहीं आया I
दिमाग कभी कभी थक कर सो जाता,
दिल ने दिन रात हंसाया और कभी कभी रुलाया I
दिमाग कभी रिश्तो को नहीं समझ पाया,
उसमे हर बार दिल ही अव्वल आया I
हमेशा असमंजस में रहता हूँ,
किसकी सुनू और किसकी न सुनू I
आपका अपना अनुराग "परदेसी" २१/०९/२०१४
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