Tuesday, 28 October 2014

फेसबुक का पंचनामा (हास्य कविता )

फेसबुक का पंचनामा (हास्य कविता )

आज कल फेसबुक का बुखार,
लाइक, शेयर और पोस्ट करते बार बार!!

पहले रेडियो पे आती गीत बहार
फिर टीवी पर चलता चित्रहार
अब फेसबुक पे ही सारे समाचार
अब बैठ के गप्पे नहीं मारते दोस्त चार
कोई खेले अंदर, कोई कूदे बाहर
कैरम, ताश, अनंताक्षरी से नहीं रहा प्यार
अब तो कंप्यूटर स्क्रीन पर सिमट आया संसार
वो भी था, यह भी है एक खुमार
थोड़े दिनों में उतर जायेगा मेरे यार
फिर मार्किट में आएगा कोई नया तीखा आचार 

आज कल फेसबुक का बुखार...............

तुम्हारी तस्वीर को मोनालिसा बना दिया
25 लाइक्स, 5 कमेंट्स और 2 शेयर करवा दिया
कितने और किसने किया लाइक, कारोबार बना दिया 
सब को ब्यूटीफुल, प्रीटी, खूबसूरत दिखा दिया
किसी को हेमामालिनी किसी को धर्मेंदर बना दिया
ढेर सारे फैंस से उसे पसंद करवा दिया
तुम को सब ने चंने के झाड़ पे चढ़ा दिया
कितनो को इसने कवि और कितनो को शायर बना दिया
रोज लिखते ससुरे, श्यारी को सब्जी मंडी बना दिया
तुमने खुद को गुलज़ार और जावेद अख्तर का दर्जा दिलवा दिया
कॉपी और पेस्ट कर थकते नहीं, खुद को ज्ञानी बतला दिया

आज कल फेसबुक का बुखार...........................

फेसबुक ने हमारे फेस को सही में बुक बना दिया
किताब की तरह चुप, हमारे मुँह को सिलवा दिया
एक दूसरे का सुख दुःख सब यही बतला दिया 
बातचीत, नमस्ते, नमस्कार सब को भुला दिया
अपनों को दूर और दूर वालो का नज़दीक करवा दिया

आज कल फेसबुक का बुखार...............................

तुम्हारी फिल्म को तुमने खुद ही इसमें रिलीज़ करवाया
तुम्हारा कच्चा चिठा सब इसने तुमसे से खुलवाया
कहा गए, किसको मिले, क्या खाया
कब सोये, कब उठे, कब नहाया
कब पैदा हुए, कब हुई शादी सब बतलाया 
तुम्हारे जन्मदिन पर अंजानो को भी बुलाया  
बीवी का जन्मदिन याद नहीं, पर फेसबुक पर सब को सलाम भिजवाया
शादी की सालगिरह पर किंडरगार्डेन वाले दोस्त का पैगाम भी आया
घर वालो को तुम्हारी खबर नहीं, दुनिया को तुमने अपना पूरा कुंडली पढ़वाया

आज कल फेसबुक का बुखार.................................

फेसबुक का हंगामा है
सब ने इसका हाथ थामा है
यह हमारा लिखा खबरनामा है 
तुम्हारी ज़िन्दगी का पंचनामा है 

आज कल फेसबुक का बुखार
लाइक, शेयर और पोस्ट करते बार बार


आपका अपना अनुराग "परदेसी" २५/१०/२०१४

No comments:

Post a Comment