फ़रियाद
ज़िंदा रहने की आदत नहीं रही,
फिर भी दिन रात जीते,
पर अब जीने में पुराने दिनों जैसी बात नहीं आती I
फिर भी दिन रात जीते,
पर अब जीने में पुराने दिनों जैसी बात नहीं आती I
तेरी खुशबू, सिर्फ तेरी थी,
बाजार में फूल बहुत पर उनकी खुशबू में तेरी खुशबू नहीं आती I
जब से हम तुम जुदा हुए तेरी याद बहुत आती,
यह आलम की तेरी यादो की भी याद आती I
लगता है अब हमारी सांसे मरने लगी,
अब सांसो में साँस नहीं आती I
प्यार तो बहुत बिकता
पर उनके प्यार में तेरे प्यार जैसी इबादत नहीं आती I
बाजार में फूल बहुत पर उनकी खुशबू में तेरी खुशबू नहीं आती I
जब से हम तुम जुदा हुए तेरी याद बहुत आती,
यह आलम की तेरी यादो की भी याद आती I
लगता है अब हमारी सांसे मरने लगी,
अब सांसो में साँस नहीं आती I
प्यार तो बहुत बिकता
पर उनके प्यार में तेरे प्यार जैसी इबादत नहीं आती I
ज़िंदा लाश बने फिरते है गली कूचों में,
मौत के धुएं के दो कश लेते जब, वही दो पल जी लेते है I
मुरझा गए है, अब पानी न पिलायो
ज़हर के दो घूंट जब पीते, वही दो पल जी लेते है I
आँखों में चुबती है रौशनी, दीये न जलायो,
जब बुझते सारे दीये, वही दो पल जी लेते है I
पुराने ज़ख्म न कुरेदो, मलहम खत्म हो चुकी,
नए ज़ख़्म जब लगते, वही दो पल जी लेते है I
आंसू नहीं बहते अब आँखें पत्थर हो चुकी,
कभी जब दिल नम होता, वही दो पल जी लेते है
मौत के धुएं के दो कश लेते जब, वही दो पल जी लेते है I
मुरझा गए है, अब पानी न पिलायो
ज़हर के दो घूंट जब पीते, वही दो पल जी लेते है I
आँखों में चुबती है रौशनी, दीये न जलायो,
जब बुझते सारे दीये, वही दो पल जी लेते है I
पुराने ज़ख्म न कुरेदो, मलहम खत्म हो चुकी,
नए ज़ख़्म जब लगते, वही दो पल जी लेते है I
आंसू नहीं बहते अब आँखें पत्थर हो चुकी,
कभी जब दिल नम होता, वही दो पल जी लेते है
ज़िंदा रहने की आदत नहीं रही,
फिर भी दिन रात जीते,
पर अब जीने में पुराने दिनों जैसी बात नहीं आती
फिर भी दिन रात जीते,
पर अब जीने में पुराने दिनों जैसी बात नहीं आती
आपका अनुराग "परदेसी" २०/०९/२०१४
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