यादें
ज़िन्दगी के सफर में क्या क्या पीछे छूट जाता है,
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
ज़िन्दगी के सफर में क्या क्या पीछे छूट जाता है,
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कुछ तो याद,
कुछ तो याद के आईने के सामने नहीं आता,
कुछ लम्हे उम्र भर याद,
पर इंसान कितने साल ऐसे ही भूल जाता,
कड़वा स्वाद उम्र भर,
मीठा मुह का स्वाद छोड़ जाता I
कुछ तो याद के आईने के सामने नहीं आता,
कुछ लम्हे उम्र भर याद,
पर इंसान कितने साल ऐसे ही भूल जाता,
कड़वा स्वाद उम्र भर,
मीठा मुह का स्वाद छोड़ जाता I
ज़िन्दगी के सफर में क्या क्या पीछे छूट जाता है,
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कुछ लम्हों का रहता बरसो इंतजार,
कुछ को याद करते हम बार बार,
कुछ भूलने भी भूलते नहीं,
हमेशा दिल पे करते वार,
कुछ तो दुनिया वाले भूलने नहीं देते,
कोशिश करो तुम चाहे हज़ार I
कुछ को याद करते हम बार बार,
कुछ भूलने भी भूलते नहीं,
हमेशा दिल पे करते वार,
कुछ तो दुनिया वाले भूलने नहीं देते,
कोशिश करो तुम चाहे हज़ार I
ज़िन्दगी के सफर में क्या क्या पीछे छूट जाता है,
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कहानिया तो बहुत लिखते,
ज़्यादा अधूरी रह जाती,
चंद ही मुक्मल हो पाती,
जो मुक्मल हुई,
वो सब भी मुकाम नहीं पाती,
जो मुकाम तक पहुंची,
वही अपने को याद रह जाती I
ज़्यादा अधूरी रह जाती,
चंद ही मुक्मल हो पाती,
जो मुक्मल हुई,
वो सब भी मुकाम नहीं पाती,
जो मुकाम तक पहुंची,
वही अपने को याद रह जाती I
ज़िन्दगी के सफर में क्या क्या पीछे छूट जाता है,
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
कभी सोचा नहीं कौन कब कैसे क्यों छूट जाता है,
कुछ याद रहता कुछ न जाने क्यों भूल जाता I
आपका अपना अनुराग "परदेसी" 14/09/2014
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