राजा रानी
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I
कभी सुनी दादी के मुह से,
कभी अपनी माँ की जुबानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I
मिट्टी का था घर ,
मिट्टी का था चूल्हा,
मिट्टी के थे बर्तन,
मिट्टी के थे खिलोने I
मिट्टी से जुडी थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी
मशक से धुलती थी सड़के,
दौड़ती उन पर घोडा गाड़ी,
या कभी कभी मोटर गाड़ी I
हुक्के की हुआ करती ग़ुड गुड I
धीमी मस्तानी थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I
शिवरात्रि पर मंदिर का मेला,
कभी शहर में दंगल अलबेला I
शादी बयाह के गीत,
ढोलक का संगीत I
कितनी मधुर थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी
चौराहे पर एक दरोगा और चोर कोई नहीं,
काले कोट में एक वकील और केस कोई नहीं I
पंडित जी के सब छूते पावँ,
मास्टर जी की ऐनक और छड़ी के तॉंव I
इज्जत और ईमान थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I
आपका अपना अनुराग २९/०५/२०१४
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