Thursday, 15 May 2014

चिड़िया

I wrote this one late into last night after seeing the video of the abducted girls in Nigeria.
Let’s pray for their safe return, I am sure all of you will be in the same agony and pain as I am.
Lets test the power of prayers.


चिड़िया
हर रोज सुबह मेरे उठने से पहले ही वो मेरे बगीचे में आ जाती थी
इतनी सुन्दर इतनी मासूम थी, चहक चहक के मुझे जगाती थी
मैं अपनी चाय पीता और वो बाग़ में लगे फूलो से प्यास बुझाती थी       
हम दोनों की भाषा अलग, पर फिर भी वो मेरे साथ बतियाती थी
ना जाने कहा खो गयी, इतने दिनों से वो नहीं चहचहचाती थी

मासूम नादाँ चिड़िया को आज किसी ने  पिंजरे में क़ैद कर लिया
भोलीभाली को खबर तक नहीं उसे क्यों पिंजरे में क़ैद कर लिया
बिना मुह खोले  डरी डरी आँखों से पूछती है उसने क्या कर दिया
कुछ खाती नहीं, कुछ पीती नहीं, आंसुओ से अपना पेट भर लिया
जानती है उड़ नहीं सकती, अपने पंखो को समेट के अंदर कर लिया


पिंजरे के बाहर खड़ा शैतान चिड़िया को देख देख कर मुस्कुराया
मर्दानगी पर बहुत नाज़ था, उसने आज उसको चिड़िया पर आजमाया
मेरी चिड़िया का रंग बदल दिया,उस ज़ालिम ने उसको बहुत तड़पाया
अपनी मजहबी जंग में उसने मेरी  चिड़िया को मोहरा बनाया
सारी दुनिया को खबर थी, पर न जाने क्यों कोई कुछ नही कर पाया

गहरे बादल छाये लगता है आज कोई बहुत बड़ा तूफान आया 
आसमां पर चमकी बिजली और शैतान पर उसने केहर बरपाया  
आखिर खुदा का दिल पसीजा उसने शैतान को दोजख में पहुँचाया
तेज हवा से खुल गया पिंजरा,  नन्नी चिड़िया ने  अपना पंख फैलाया
सुबह उठा मैं तो अपने प्यारे दोस्त को अपने बगीचे में चहकता पाया    

Aapka Apna Anurag 12/05/2014


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