Tuesday, 27 May 2014

विरासत

विरासत

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है  
किसी को कम, तो किसी को बहुत ज़्यादा मिलता है
किसी को धन दौलत, किसी को सिर्फ संस्कार मिलता है
कहते है विरासत नसीब का खेल है जो मिलता है
हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है

दशरथ ने दिया राम को राजपाठ पर उसको लेना पड़ा बनवास
गौतम को भी मिलता राजपाठ पर वो तो खुद ले बैठा सन्यास
रावण गँवा बैठा सोने की लंका, उसे था अपने पर अहंकारी विश्वास 
कबीर तो बनता जुलाहा पर उसको तो ज्ञान का हुआ अदभुत अहसास 
कमल को कीचड मिला, पर वो उसमे भी खिला, उसका है यह साहस
खजूर को मिली सूरज की गर्मी,पर उसमे फिर भी है कितनी मिठास

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है

विरासत की लम्बी चादर तुम ओढ़ के सो जाते हो,
या उसको लिपटा के अपनी नयी दुनिया सजाते हो
विरासत का बीज बो कर क्या तुम बब्बुल उगाते हो, 
या अपने खेतो में मेहनत से सरसों ललाहायते हो
विरासत का खज़ाना अपनों पे ही लुटाते हो, 
या उस से कुछ पुण्य भी कमाते हो

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है

आपका अपना अनुराग "परदेसी" २५/०५/२०१४


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