क्या तुम ज़िंदा हो ?
जीने की चाह तुम
में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
सब रास्ते बंद,
पर एक राह खुली, तो तुम ज़िंदा हो
हज़ारो बार हारो,
जब तक तुम न मानो तुम ज़िंदा हो
तुम ज़ख़्मी, पर
जब तक हाथ में तलवार,तो तुम ज़िंदा हो
देते हो प्यार,
पाते हो दुसरो का प्यार, तो तुम ज़िंदा हो
जीने की चाह तुम
में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
मंदिर के साथ कभी
मैख़ाना तो तुम ज़िंदा हो
दवा के साथ कभी
कभी दारू तो तुम ज़िंदा हो
भजन के साथ कभी
कभी ग़ज़ल तो तुम ज़िंदा हो
सच में कभी कभी,
झूठ का तड़का तो तुम ज़िंदा हो
जीने की चाह तुम
में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
चलते रहो, कभी
दौड़ के सांस फूल जाये तो ज़िंदा हो
किसी को देख कर
दिल की धड़कन तेज, तो ज़िंदा हो
थकी हुई आँखें
कभी कभी मचले, तो तुम ज़िंदा हो
तुम्हारे हाथ किसी
का हाथ अब भी पकडे, तो ज़िंदा हो
जीने की चाह तुम
में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
घर से कभी कभी
निकलो बाहर, तो तुम ज़िंदा हो
परिवार के साथ
कुछ चंद दोस्त, तो तुम ज़िंदा हो
मुस्कुराहट के
साथ कभी ज़ोर की हंसी, तो तुम ज़िंदा हो
पथरीली आँखों में
कभी कभी आंसू, तो तुम ज़िंदा हो
हवा में ऊँचा नीचे
उड़ते रहो, तो तुम परिंदा हो
अब अपने अंदर झांक
के देखो क्या तुम ज़िंदा हो
आपका अपना अनुराग
" परदेसी" ०४/०५/२०१४
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