हत्या का बीज
आज बहुत खुश थे वो,
आज वो बाजार से बीज लाये थे I
बड़े प्यार से बोते थे वो
आज वो बाजार से बीज लाये थे I
कब से इंतजार में थे वो,
आज वो बाजार से बीज लाये थे I
हर रोज पानी देते थे वो,
आज वो बाजार से बीज लाये थे I
बड़े ध्यान से रखते थे वो,
आज वो बाजार से बीज लाये थे I
सूरज की पहली किरण निकलते,
मासूम नन्नी कलियाँ खिल आई थी I
कलियों का लाल रंग देखते,
उनकी आँखे लाल हो आई थी I
आँगन में फूल नहीं खिलते,
तलवार की दार तेज हो आई थी I
अब पूरे दिन भी नहीं ढलते,
पैदा होने से पहले उनकी मौत आई थी I
अब माली पर लोग भरोसे नहीं करते,
बगीचे की सब कलियाँ मुरझा आई थी I
अगर फूलों की कदर न हो, तो तुम क्यों बीज बोते हो I
रंग देख कर फूल चुनते हो, तो तुम क्यों बीज बोते हो I
जब तुम खुद बंज़र हो, तो तुम क्यों बीज बोते हो I
दुनिया में सब रंग के फूल हो तो, तभी तो बाग़ अच्छे लगते है I
बगीचे में सब फूल खिले हो, तभी तो बगीचे सुन्दर लगते है I
Trigger for this one is – Female Foeticide (कन्या भ्रुण हत्या)
आपका अपना अनुराग "परदेसी" ३०/०५/१४
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