हकीकत
पेड़ो से सूख के झड़े पत्ते, पेड़ो
के नीचे ही गिरे मिलते है
तेज हवाओं से डरते है बेचारे,
इसलिए सहमे और डरे मिलते है
कुछ दोबारा हरे हो कर किसी शाख
पर लटकने की उम्मीद रखते है,
कुछ अपने अंतिम दिनों में, पेड
से थोड़ी ठंडी छाँव की उम्मीद रखते है
पेड़ो से सूख के झड़े पत्ते, पेड़ो
के नीचे ही गिरे मिलते है
आँख से निकले आंसू, आँख से निकले
आंसू, गालो पर ही बहे मिलते है
कुछ सूख कर हमारी गालो पर नमक
बन जाने की उम्मीद रखते है
कुछ बहते बहते हमारे दिल तक पहुंच
जाने की उम्मीद रखते है
पेड़ो से सूख के झड़े पत्ते, पेड़ो
के नीचे ही गिरे मिलते है
तेज हवाओं से डरते है बेचारे,
इसलिए सहमे और डरे मिलते है
चिराग तले चाहे कितना अँधेरा
हो ऊपर तो हमेशा दीये जले मिलते है
मंदिर मस्जिद में मत ढूंढो, भगवान
तुमको हमेशा तुम्हारे अंदर मिलते है
उम्र भर तलाशते रहो सकून को पुरे
सकून तो दो गज़ ज़मीन में ही मिलते है
पेड़ो से सूख के झड़े पत्ते, पेड़ो
के नीचे ही गिरे मिलते है
तेज हवाओं से डरते है बेचारे,
इसलिए सहमे और डरे मिलते है
अपने बिछड़ जाने के बाद भी हमेशा
अपने दिल के किसी कोने में मिलते है
कीमती मोती कभी कभी गहरे समुन्दर
में नहीं, रेत के नीचे दफ़न मिलते है
सच्चे प्यार करने वाले, हमेशा
किनारे पर खड़े इंतजार करते हुए मिलते है
पेड़ो से सूख के झड़े पत्ते, पेड़ो
के नीचे ही गिरे मिलते है
तेज हवाओं से डरते है बेचारे,
इसलिए सहमे और डरे मिलते है
आपका अपना अनुराग " परदेसी" ०५/०६/२०१४
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