खो गयी मेरी आवाज
बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज, बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज
हिम्मत नहीं है अपने से ही अपनी आँख मिलाने की आज
अपने से ही चुरा रहा हूँ, और अपनों से चुरा रहा आँखे आज
कोशिश भी करू, खोल नहीं सकता आपके सामने अपना राज
चुप ऐसा हुआ हूँ, नहीं बजता अब कोई अपना नया पुराना साज
दिन भर बोलता था, न जाने कहा खो गयी मेरी खुद की आवाज
थमने का नाम नहीं ले रहे, नींद में भी टपक जाते है आंसू चार
जिनको कभी सपने में भी नहीं दिया, उनको दे दिया दर्द बेशुमार
अब तक जीतने का था घुमान, इस बार अपने से ही हुई अपनी हार
दिल अपनों का दुखाया, शिदत से इंतजार है अपनी सजा का इस बार
बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज, बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज
हिम्मत नहीं है अपने से ही अपनी आँख मिलाने की आज
रात काली अँधेरी थी, पर अब दिन में भी नहीं दिखता है उजाला
आईने के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं, चहेरा हो चुका है काला
उनकी ही मुस्कराहट छीन ली हमने, जिनको हमने उमर भर था संभाला
उम्मीद नहीं वो वापिस आयेगा फिर कभी जो बीत गया वक़्त मतवाला
बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज, बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज
हिम्मत नहीं है अपने से ही अपनी आँख मिलाने की आज
मेहनत,प्यार से पिरोया अपनी ज़िन्दगी का हार आज टूट गया
हार का एक एक फूल देखते ही देखते अपने हाथो से छूट गया
आवाज बंद,चहेरा काला, अपनी ठोकर से अपना ही घर टूट गया
कुछ न कर सका, हर कोई हमसे आज हमेशा के लिए छूट गया
बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज, बहुत मुश्किल में हूँ मैं आज
हिम्मत नहीं है अपने से ही अपनी आँख मिलाने की आज
Aapka Apna Anurag " Pardesi" 02/06/2014
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