Tuesday, 10 June 2014

आम अभी कच्चे है

आम अभी कच्चे है 

इस बरस कहते है फसल अच्छी है, आम बहुत जल्दी पक आये है I 
चख के देखे तो अभी थोड़े कच्चे थोड़े खटे थे, आम पक आये है II

बहुत अर्से के बाद हमारे घर आज कुछ खास मेहमान आये है I
दरवाजे से ही मिल के लौट गए, हमारे आज कुछ खास मेहमान आये है II

हम कही डूब न जाये, वो हमारे लिए नयी किश्ती ले के आये है I
किश्ती में सुराख़ हैं, ताकि हम प्यासे न रह जाये, वो किश्ती ले के आये है II

हम बाजार से आज नई चमकती हांड़ी खरीद के ले आये है I
चूहले में आग कब से बुज चुकी, हम हांड़ी खरीद के ले आये है II

पुराने शहर की मिठाई बहुत मशहूर थी, वो आज फिर खाने आये है I
मिठाई अब कब से नमकीन हो चुकी, वो फिर आज मिठाई खाने आये है II

वो आज हमारी चोखट पर अपनी बारात सजा के आये है I
हमारी डोली कब की उठ चुकी, वो बारात ले के आये है II

महलो में महफिले जमा करती थी, आज वो फिर महफ़िल सजाने आये है I
महल अब कब के खंडहर हो चुके, वो महफिले सजाने आये है II

उनके सवाल खत्म ही नहीं होते, वो फिर सवाल पूछने आये है I
हम सारे ज़वाब दे चुके कब से, वो सवाल पूछने आये है II

इस बरस कहते है फसल अच्छी है, आम बहुत जल्दी पक आये है I
चख के देखे तो अभी थोड़े कच्चे, थोड़े खटे थे, आम पक आये है II

आपका अपना अनुराग "परदेसी" ०६/०६/२०१४

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