Friday, 30 May 2014

राजा रानी

राजा रानी

एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I
कभी सुनी दादी के मुह से,
कभी अपनी माँ की जुबानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I

मिट्टी का था  घर ,
मिट्टी का था चूल्हा,
मिट्टी के थे बर्तन,
मिट्टी के थे खिलोने I
मिट्टी से जुडी थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी

मशक से धुलती थी सड़के,
दौड़ती उन पर घोडा गाड़ी,
या कभी कभी मोटर गाड़ी I
हुक्के की हुआ करती ग़ुड गुड I
धीमी मस्तानी थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I

शिवरात्रि पर मंदिर का मेला,
कभी शहर में दंगल अलबेला I
शादी बयाह के गीत,
ढोलक का  संगीत I
कितनी मधुर थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी

चौराहे पर एक दरोगा और चोर कोई नहीं,
काले कोट में एक वकील और केस कोई नहीं I
पंडित जी के सब छूते पावँ,
मास्टर जी की ऐनक और छड़ी के तॉंव I
इज्जत और ईमान थी ज़िंदगानी I
एक था राजा एक थी रानी,
यह कहानी बहुत पुरानी I

आपका अपना अनुराग २९/०५/२०१४

Tuesday, 27 May 2014

विरासत

विरासत

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है  
किसी को कम, तो किसी को बहुत ज़्यादा मिलता है
किसी को धन दौलत, किसी को सिर्फ संस्कार मिलता है
कहते है विरासत नसीब का खेल है जो मिलता है
हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है

दशरथ ने दिया राम को राजपाठ पर उसको लेना पड़ा बनवास
गौतम को भी मिलता राजपाठ पर वो तो खुद ले बैठा सन्यास
रावण गँवा बैठा सोने की लंका, उसे था अपने पर अहंकारी विश्वास 
कबीर तो बनता जुलाहा पर उसको तो ज्ञान का हुआ अदभुत अहसास 
कमल को कीचड मिला, पर वो उसमे भी खिला, उसका है यह साहस
खजूर को मिली सूरज की गर्मी,पर उसमे फिर भी है कितनी मिठास

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है

विरासत की लम्बी चादर तुम ओढ़ के सो जाते हो,
या उसको लिपटा के अपनी नयी दुनिया सजाते हो
विरासत का बीज बो कर क्या तुम बब्बुल उगाते हो, 
या अपने खेतो में मेहनत से सरसों ललाहायते हो
विरासत का खज़ाना अपनों पे ही लुटाते हो, 
या उस से कुछ पुण्य भी कमाते हो

हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलता है
हर एक को विरासत में कुछ न कुछ मिलता है

आपका अपना अनुराग "परदेसी" २५/०५/२०१४


मेरे मेहबूब

मेरे मेहबूब  

मेरे मेहबूब के घर से आज वो मेरे लिए उनका पहला और आखरी पैगाम ले के आये
पता चला की उनकी आखरी ख्वाइश थी वो हमारे कंधे पर अपना सर रख के जाये  
जिनको सुर्ख जोड़े में देखने की चाह थी, आज उनको सफ़ेद लिबास में देख कर आये
उनकी मांग तो सिंदूर से नहीं भर सके पर आज उनको फूलो का हार पहना आये
जिनसे ज़िन्दगी भर साथ की उम्मीद थी, आज हम उनके जनाजे में शरीक हो कर आये
सब ने उनको देख के आंसू बहाये पर वो लेटे लेटे हमारी तरफ देख कर आज मुस्कराये
हम इंतजार करते ही रहे शायद अब की बार, वो हम के देख प्यार का गीत घुनघुनाये

दुनिया ने मिलने न दिया हमको, आखिर आज हम उनको जी भर के देख पाये
आज उनके चहेरे को हम न जाने कितने बरसो की कोशिश के बाद पुरा पढ़ पाये
आज हम दुनिया के सामने पहली बार उनसे अपनी दिल की बात खुल कर कह पाये
रेशमी ज़ुल्फ़ें. बड़ी बड़ी आँखे, होठो के नीचे काला तिल, अब भी हमे बहुत सुन्दर नज़र आये 
चाँद की परछाई देखते थे आज नसीब की हम अपना चाँद अपनी आँखों से देख कर आये
उनको आखरी बार छु कर हम उनके बदन की खुशबू अपने हाथो में समेट के ले आये
मेरे मेहबूब के घर से आज वो मेरे लिए उनका पहला और आखरी पैगाम ले के आये

उनको सब उनकी कब्र में दफना आये पर हम उनको हमेशा के लिए अपने साथ वापिस ले आये
उनकी आँखों को अपनी आँखों में और उनकी दिलकश मुस्कान को अपनी दिल में क़ैद कर लाये
ज़िन्दगी में एक ने हो पाये, पर लगता है जाते जाते वो हमेशा के लिए हमारे हो पाये
हमारे कई बरसो से सूखे पड़े दरख़्त पर फिर चंद  नन्ने नन्ने  पते फूट कर  निकल आये
अब इंतजार है बेसब्री से उस दिन का जब हम भी अपनी मेहबूब के पास पहुँच पाये
खुदा ही जाने ये कैसा इश्क़ है, हम अब तक अपनी इस दास्तान को न समझ पाये
मेरे मेहबूब के घर से आज वो मेरे लिए उनका पहला और आखरी पैगाम ले के आये

आपका अपना अनुराग "परदेसी" १८/०५/२०१४




Thursday, 15 May 2014

चिड़िया

I wrote this one late into last night after seeing the video of the abducted girls in Nigeria.
Let’s pray for their safe return, I am sure all of you will be in the same agony and pain as I am.
Lets test the power of prayers.


चिड़िया
हर रोज सुबह मेरे उठने से पहले ही वो मेरे बगीचे में आ जाती थी
इतनी सुन्दर इतनी मासूम थी, चहक चहक के मुझे जगाती थी
मैं अपनी चाय पीता और वो बाग़ में लगे फूलो से प्यास बुझाती थी       
हम दोनों की भाषा अलग, पर फिर भी वो मेरे साथ बतियाती थी
ना जाने कहा खो गयी, इतने दिनों से वो नहीं चहचहचाती थी

मासूम नादाँ चिड़िया को आज किसी ने  पिंजरे में क़ैद कर लिया
भोलीभाली को खबर तक नहीं उसे क्यों पिंजरे में क़ैद कर लिया
बिना मुह खोले  डरी डरी आँखों से पूछती है उसने क्या कर दिया
कुछ खाती नहीं, कुछ पीती नहीं, आंसुओ से अपना पेट भर लिया
जानती है उड़ नहीं सकती, अपने पंखो को समेट के अंदर कर लिया


पिंजरे के बाहर खड़ा शैतान चिड़िया को देख देख कर मुस्कुराया
मर्दानगी पर बहुत नाज़ था, उसने आज उसको चिड़िया पर आजमाया
मेरी चिड़िया का रंग बदल दिया,उस ज़ालिम ने उसको बहुत तड़पाया
अपनी मजहबी जंग में उसने मेरी  चिड़िया को मोहरा बनाया
सारी दुनिया को खबर थी, पर न जाने क्यों कोई कुछ नही कर पाया

गहरे बादल छाये लगता है आज कोई बहुत बड़ा तूफान आया 
आसमां पर चमकी बिजली और शैतान पर उसने केहर बरपाया  
आखिर खुदा का दिल पसीजा उसने शैतान को दोजख में पहुँचाया
तेज हवा से खुल गया पिंजरा,  नन्नी चिड़िया ने  अपना पंख फैलाया
सुबह उठा मैं तो अपने प्यारे दोस्त को अपने बगीचे में चहकता पाया    

Aapka Apna Anurag 12/05/2014


Saturday, 10 May 2014

भगवान तेरे लिए तेरा वरदान

भगवान तेरे लिए तेरा वरदान 

ना अपने  लिए, ना अपनों के लिए कभी मांगा तुम से वरदान
हमेशा प्रार्थ्रना की और सिर्फ चाहा तुम्हारा आशीर्वाद भगवान
अपने कर्मो और हाथो पर था विश्वास के पुरे होगे अपने अरमान
उंच नीच, भेद भाव, नहीं किया किसी से, संस्कारो का किया सम्मान 
जो पढ़ा, जो लिखा, वही बेटे बेटी को पढ़ाया, दोनों को समझा एक समान  
ज़िन्दगी खूबसूरत है, हम किसी का बुरा करे इससे पहले तू ले लेना हमारे प्राण   

ना अपने  लिए, ना अपनों के लिए कभी मांगा तुम से वरदान
अभी भी अपने लिए नहीं, इंसानियत के लिए मांग रहे भगवान
देखते तो जरूर होगे, की क्या करे रहे तुम्हारे बनाये हुए इंसान
तुम्हारे नाम पर कर रहे पूरी दुनिया को शर्मसार और लहूलुहान 
तेरे नाम पर मार रहे और मर रहे खोल के बैठे मौत की दुकान 
ज़हर की फसले बो रहे ना जाने कब रुकेगा यह खुनी तूफान 

ना अपने  लिए, ना अपनों के लिए कभी मांगा तुम से वरदान
कहते है बहनो को पढ़ाओ मत, ये तुम्हारी किताब का है ज्ञान
जग जननी के बच्चे ही उसके जीने देंगे, उसका इतना करेंगे अपमान
जिसने लिखना सिखाया, उसके हाथो से छीन कलम उसे कर देंगे बेजुबान 
उसके चेहरे पर डाल कर  काला परदा, उसकी आँखों का लेगे इम्तिहान 
जीते जी मार देंगे उसे, और वो बन के रह जाएगी घर का एक सामान 

ना अपने  लिए, ना अपनों के लिए कभी मांगा तुम से वरदान
इतनी जल्दी कलयुग जायेगा सोचा , अब सोच के हम है परेशान
इतना सब देखने के बाद सोचता हूँ , क्या तू अब तक नहीं हैरान
तेरे बन्दों ने इतना किया तेरा नाम बदनाम, भगवन तेरा जीना नहीं आसान 
अब किसका है इंतजार, दे तू  इन सबको मेरा माँगा  मौत का वरदान
अपने लिए नहीं, तेरे नाम की सचाई बनी रहे इसलिए  लिए मांग रहा वरदान 


Aapka Apna Anurag “ Pardesi” 09/05/2014

Wednesday, 7 May 2014

क्या तुम ज़िंदा हो ?

क्या तुम ज़िंदा हो ?

जीने की चाह तुम में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
सब रास्ते बंद, पर एक राह खुली, तो तुम ज़िंदा हो
हज़ारो बार हारो, जब तक तुम न मानो तुम ज़िंदा हो
तुम ज़ख़्मी, पर जब तक हाथ में तलवार,तो तुम ज़िंदा हो
देते हो प्यार, पाते हो दुसरो का प्यार, तो तुम ज़िंदा हो 

जीने की चाह तुम में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
मंदिर के साथ कभी मैख़ाना तो तुम ज़िंदा हो
दवा के साथ कभी कभी दारू तो तुम ज़िंदा हो
भजन के साथ कभी कभी ग़ज़ल तो तुम  ज़िंदा हो
सच में कभी कभी, झूठ का तड़का तो तुम ज़िंदा हो

जीने की चाह तुम में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
चलते रहो, कभी दौड़ के सांस फूल जाये तो ज़िंदा हो
किसी को देख कर दिल की धड़कन तेज, तो ज़िंदा हो  
थकी हुई आँखें कभी कभी मचले, तो तुम ज़िंदा हो
तुम्हारे हाथ किसी का हाथ अब भी पकडे, तो ज़िंदा हो

जीने की चाह तुम में ज़िंदा है, तो तुम ज़िंदा हो
घर से कभी कभी निकलो बाहर, तो तुम ज़िंदा हो 
परिवार के साथ कुछ चंद दोस्त, तो तुम ज़िंदा हो
मुस्कुराहट के साथ कभी ज़ोर की हंसी, तो तुम ज़िंदा हो
पथरीली आँखों में कभी कभी आंसू, तो तुम ज़िंदा हो

हवा में ऊँचा नीचे उड़ते रहो, तो तुम परिंदा हो
अब अपने अंदर झांक के देखो क्या तुम ज़िंदा हो

आपका अपना अनुराग " परदेसी" ०४/०५/२०१४ 


Thursday, 1 May 2014

हां में हां मिलाया कीजये

हां में हां मिलाया कीजये 

सब की हां में हां मिलाया कीजये 
न भी कहने से पहले जरूर मिलाया कीजये 
नींद में भी कोई आवाज दे तो हां पुकारा कीजये 
सब की हां में हां मिलाया कीजये 

सुखी जीवन का मन्त्र है इसे हर रोज जपाया कीजये 
घर वालो के साथ हमेशा, बाहर वालो से भी मिलाया कीजये 
बच्चो से अब बच्चो जैसी बात नहीं,उनकी सलाह से घर चलाया कीजये 
सब की हां में हां मिलाया कीजये

मौसम खुश्गवार नहीं, दोस्तों और दुश्मनो को पहचान जाया कीजये
दिल से बिलकुल नहीं, दिमाग से ही काम चलाया कीजये
सचाई क्या चीज़ है, झूठ के पुलिँदै बनाया कीजये
सब की हां में हां मिलाया कीजये

कब मौसम बदल जाये घर से रोज छाता ले के निकल आया कीजये
पिस्तौल खाली हो या भरी हमेशा लोगो को डराया कीजये
मुद्दे की खबर न भी हो ,सब के साथ मिल के नारे जरूर लगाया कीजये
सब की हां में हां मिलाया कीजये

दिन में सोने की आदत डाले, अब रातो में अपने को जगाया कीजये
शादी बयाह अब दो दिन का मेला, विदाई पर आंसू मत बहाया कीजये
जनाजो में अब आंसू नहीं बहते काले चश्मे पहन के जाया कीजये
सब की हां में हां मिलाया कीजये

आपका अपना अनुराग "परदेसी" ३०/०४/१४